गीत लिखती किसलिए मैं ।
मनपटल पर भाव आते,
हाथ मेरे रूक न पाते ।
शब्द कागज पर उतरते,
और तभी विश्राम पाते,
पीर मनकी ढालना है, गीत लिखती इसलिए ॥
बात कुछ ऐसी जहाँ की,
कह सपूँ ये कामना है,
जिसकी चर्चा भी किसी से
और कभी करना मना है,
गाँठ मनकी खोलना है गीत लिखती इसलिए ॥
गीत फूलों जैसे महकें,
ओस की ठंडक से सिहरें
बनके बरखा रसभिगोदें
लहर बनके तटको छूले,
प्रकृति के संग झूमना है, गीत लिखती इसलिए ॥
प्रेम की महिमा लिखूँ मैं,
छींट कर खुशबू के छींटे
मधुरिमा इसकी लिखूँ मैं,
प्रेमरस में पागना है गीत लिखती इसलिए ॥
मनके दर्पण क्यों है मैले
क्यों समर्पण भी कसैले,
जिस तरफ नजरें उठाउँ,
इनके घूँघट खोलना है, गीत लिखती इसलिए ॥
व्यस्त मेजों को लिख्रू मैं,
मस्त सेजों को लिखूं मैं,
त्रस्त मानवता लिखूं मैं,
ध्वस्त नैतिकता लिखूँ मैं,
दीप सच के बालना है, गीत लिखती इसलिए ॥
आशा श्रीवास्तव
Thursday, April 23, 2009
Saturday, February 14, 2009
Giving Certificate to Asha Shrivastava and other Guest
Giving Certificate to Asha Shrivastava and other Guest in Harshavardhan Jayanti at Allahabad
पाकिस्तान / विनाशिस्तान
कठोर तपस्या से भसमासूर ने वरदान पाया कि वह जिसके सिरपर हाथ रखदेगा वह मर जायेगा। 86 से पाकिस्तान में आतंकवादिय तैयार करने का काम बकायदा चल रहा है। इसे भसमासूर की तपस्या वाला समय कहा जा सकता है। अब वह पूरी तरह विनाश के सारे हथियारों से लैस भस्मासूर बन गया और विश्व के देशों के पीछे उनके सिरपर हाथ रखने की खुल्लम-खुल्ला धमकी दे रहा है समय को इंतजार है। विष्णु के मोहिनी रूप का ताकि भस्मासूर को उसी के सीरपर हाथ रखने की स्थितियाँ पैदा हो जाय। विश्व जनमत धीरे-धीरे मोहिनी रूप धारण करता जा रहा है। हमें इंतजार है उस पल का जब अपनी ही नासमझी से भसमासूर अपने सिरपर हाथ रखता है।
कल तक ताज और आज ?
ताज सिर पर तभी बना रह सकता है जब तक वह जन कल्याण की राह चलता है। उसकी चाल खराब होने लगे तों यह स्थित बहुत दिन नहीं चलपाती और पैर का जूता पैर से निकल पड़ने को बेचैन हो जाता है और साथ ही वह हाथ को भी पटा लेता है उसे उठा लेने के लिए और चल पड़ता है हाथ ताज को सबक सिखाने। ताज मनमानी करने वाले सिर पर नहीं रहना चाहता उसे वहॉ रहने भी नहीं दिया जाता। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण जार्ज बुश का ताज है से एक साधारण से आदमी के साधारण से जूते के जरिए उसकी औकत दिखा दी गई।
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